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गणेश दत्त मिश्रा के निलंबन पर उठे सवाल ; शासनादेश और करवाई को लेकर चर्चाए तेज!

गणेश दत्त मिश्रा के निलंबन पर उठे सवाल, शासनादेश और कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज

जौनपुर। एआरटीओ कार्यालय जौनपुर के रजिस्ट्रेशन बाबू गणेश दत्त मिश्रा के निलंबन की कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। 22 अगस्त 2026 को नए डंपर के रजिस्ट्रेशन के लिए एआरटीओ कार्यालय पहुंचे एक व्यक्ति ने गणेश दत्त मिश्रा पर कथित रूप से सुविधा शुल्क मांगने का आरोप लगाया था। इसके बाद कार्यालय परिसर में हुए हंगामे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और मामला चर्चा में आ गया।

वायरल वीडियो के आधार पर गणेश दत्त मिश्रा के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई किए जाने की बात सामने आई। उच्च अधिकारियों से कार्रवाई का आधार पूछे जाने पर बताया गया कि उन्हें कार्य में अनियमितता के आरोप के चलते निलंबित किया गया है। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर अब शासनादेश में निर्धारित प्रक्रिया के पालन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

चर्चा है कि विभागीय कार्रवाई में आरोप लगाने वाले व्यक्ति से लिखित हलफनामा और आरोपों के समर्थन में साक्ष्य लिए जाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। आरोप है कि गणेश दत्त मिश्रा के मामले में निलंबन तक शिकायतकर्ता की ओर से ऐसा कोई हलफनामा अथवा साक्ष्य विभाग में प्रस्तुत नहीं किया गया। हालांकि, इस संबंध में विभागीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है।

मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह बताया जा रहा है कि जिस समय शिकायतकर्ता द्वारा सुविधा शुल्क मांगने का आरोप लगाया गया, उस समय गणेश दत्त मिश्रा विभागीय कार्य से लखनऊ गए हुए थे। वहीं, निलंबन के दिन भी उनके प्रयागराज हाईकोर्ट में विभागीय कार्य से जाने की बात सामने आई है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि संबंधित कर्मचारी कथित घटना के समय कार्यालय में मौजूद ही नहीं था तो उसके विरुद्ध लगाए गए आरोपों और निलंबन की कार्रवाई का आधार क्या था? क्या वायरल वीडियो मात्र के आधार पर निलंबन किया जा सकता है और क्या विभागीय कार्रवाई में शासनादेश में निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ? इन सवालों पर विभाग की स्पष्ट स्थिति सामने आने का इंतजार है।

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